India at UN| India called on the UN to take stand against Hinduphobia and violent bigotry targeting the Sikhism and Buddhism. | भारत ने कहा- हिंदूफोबिया का विरोध करे UN, सिख और बौद्ध के खिलाफ हिंसा बंद हो

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वॉशिंगटन2 महीने पहले

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भारत संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिंदूफोबिया का विरोध किया है। सिखों और बौद्धों के खिलाफ हिंसा को भी रोकने की मांग की है। (फाइल) - Dainik Bhaskar

भारत संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिंदूफोबिया का विरोध किया है। सिखों और बौद्धों के खिलाफ हिंसा को भी रोकने की मांग की है। (फाइल)

संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को भारत ने हिंदूफोबिया पर अपना पक्ष रखा। भारतीय प्रतिनिधि आशीष शर्मा ने कहा कि यूएन को हिंदूफोबिया के खिलाफ अपना रुख साफ करना चाहिए। उन्होंने सिख और बौद्ध धर्म पर कट्टरपंथियों के हमलों का कड़ा विरोध किया। शर्मा ने कहा कि कट्टरता दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो रही है।

बहस के दौरान भारत का पक्ष
आशीष यूएन में इंडियन मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी हैं। बुधवार को शांति की संस्कृति पर उन्होंने मजबूती से भारत का पक्ष रखा। शर्मा ने कहा- यह मंच अब तक बौद्ध, हिंदू और सिख धर्म के लोगों के खिलाफ नफरत और हिंसा के मामलों पर रुख साफ करने में नाकाम साबित हुआ है। हम इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि इस्लामोफोबिया और ईसाई विरोधी मामलों पर कार्रवाई होनी चाहिए। भारत भी इन मामलों की निंदा करता है।

चुनिंदा मामलों पर ही बात क्यों
उन्होंने कहा कि सिर्फ यहूदी, ईसाई या इस्लाम से जुड़े मामलों पर ही बात क्यों होती है। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि बामयान में भगवान बुद्ध की प्रतिमा तोड़ दी गई। अफगानिस्तान में सिख गुरद्वारे पर हमला हुआ और 25 सिख श्रद्धालुओं की मौत हो गई। कुछ देशों में हिंदुओं और बौद्धों के मंदिर तोड़े गए, अल्पसंख्यकों को खत्म किया जा रहा है। इन मामलों की भी निंदा होनी चाहिए और इन पर बात होनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि यूएन में किसी धर्म विशेष पर ही बात नहीं होनी चाहिए और न ही इसे किसी एक धर्म का पक्ष लेना चाहिए।

यूएन में 33 यूरोपीय देशों ने एक ड्राफ्ट पेश किया है। ये सभी मूल रूप से ईसाई धर्म को मानने वाले देश हैं। इजराइल या किसी मुस्लिम देश ने ड्राफ्ट को तैयार करने में हिस्सा नहीं लिया। इसमें सामाजिक, मानवीय और संस्कृति जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।

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