Coronavirus Vaccine Zydus Cadila vaccine Phase 1 Phase 2 Trial Result; Here’s All You Need To Know About | फेज-1 और 2 में जायडस कैडिला की वैक्सीन भी प्रभावी; 30 हजार वॉलंटियर्स पर होंगे फेज-3 ट्रायल्स


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एक महीने पहले

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अहमदाबाद में जायडस कैडिला की वैक्सीन फेसिलिटी। - Dainik Bhaskar

अहमदाबाद में जायडस कैडिला की वैक्सीन फेसिलिटी।

  • फेज-1 और फेज-2 ट्रायल्स में सेफ और इम्युनोजेनिक साबित हुई ZyCov-D
  • जायडस कैडिला ने फेज-3 ट्रायल्स के लिए ड्रग रेगुलेटर से मांगी है अनुमति

भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के बाद दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जायडस कैडिला ZyCov-D ने भी महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। अहमदाबाद की कंपनी जायडस कैडिला ने अपनी वैक्सीन के लिए भारत में ड्रग रेगुलेटर से फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए अनुमति मांगी है। इसमें 30 हजार वॉलंटियर्स को शामिल करने की योजना है। फेज-1 और फेज-2 के ट्रायल्स में कंपनी की वैक्सीन सुरक्षित साबित हुई है।

कंपनी ने कहा कि उसने अपनी प्लाज्मिड DNA वैक्सीन का फेज-1/2 ट्रायल्स डेटा ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. वीजी सोमानी को सौंप दिया है। कंपनी का दावा है कि उसकी वैक्सीन सेफ और इम्युनोजेनिक है। कंपनी के मुताबिक, जरूरी अप्रूवल मिलने के बाद कंपनी 30 हजार वॉलंटियर्स पर फेज-3 ट्रायल्स करेगी। इस वैक्सीन की फेज-2 स्टडी में देशभर के 1,000 स्वस्थ वॉलंटियर्स को चुना गया था। ट्रायल्स की समीक्षा इंडिपेंडेंट डेटा सेफ्टी मैनेजमेंट बोर्ड (DSMB) ने की है। उसने अपनी रिपोर्ट सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) को सौंप दी है।

जायडस की वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोसेस में नेशनल बायोफार्मा मिशन, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल, बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने भी सहयोग किया है। जायडस ग्रुप के चेयरमैन पंकज आर. पटेल ने कहा कि फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल में सेफ्टी साबित होने पर हमने फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स पूरे कर लिए हैं। वैक्सीन अब तक सेफ और इम्युनोजेनिक साबित हुई है। हम फेज-3 नतीजों के अच्छे डेटा को लेकर आश्वस्त है। उसके बाद हम वैक्सीन का प्रोडक्शन शुरू करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 नवंबर को कैडिला की अहमदाबाद स्थित वैक्सीन फेसिलिटी का दौरा किया था। इसमें उन्होंने वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोसेस को समझा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 नवंबर को कैडिला की अहमदाबाद स्थित वैक्सीन फेसिलिटी का दौरा किया था। इसमें उन्होंने वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोसेस को समझा था।

DNA प्लेटफॉर्म पर बनी है वैक्सीन

ZyCoV-D के साथ कंपनी ने देश में DNA वैक्सीन प्लेटफॉर्म को सफलता के साथ स्थापित किया है। इस प्लेटफॉर्म पर बनी वैक्सीन ने बेहतर स्टेबिलिटी दी है और इससे कोल्ड चेन की जरूरत भी नहीं होगी। इससे यह वैक्सीन देश के दूरदराज के क्षेत्रों में भी पहुंचाने के लिए आदर्श है। इंट्राडर्मल रूट से दी जाने वाली यह वैक्सीन लगाने में भी आसान होगी। यह प्लेटफॉर्म मैन्युफैक्चरिंग को आसान बनाता है और बायोसेफ्टी जरूरतें (BSL-1) भी कम हो जाती हैं।

कैसे काम करती है यह वैक्सीन

प्लाज्मिड DNA इंसानी शरीर में जाने पर वायरल प्रोटीन बन जाता है। यह शरीर को वायरस के वास्तविक हमले जैसा अनुभव कराता है। इससे शरीर में वायरस के प्रति मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स विकसित होता है। यह वायरस को बढ़ने से रोकता है। अगर कोई वायरस अपना आकार-प्रकार बदलता है यानी उसमें म्युटेशन होता है तो इस वैक्सीन को कुछ ही हफ्तों में बदला जा सकता है।



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