Amartya Sen; Nobel laureate Amartya Sen Speaks On Political Parties Personal Goals Over Communalism | अमर्त्य सेन बोले- बंगाल के लोग सांप्रदायिकता को नकारकर ही टैगोर और नेताजी के वारिस बन सकते हैं


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कोलकाताएक महीने पहले

विश्व भारती यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने ममता सरकार को लेटर लिखकर अमर्त्य सेन पर उनकी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। इसके बाद से बंगाल की सियासत में यह मुद्दा गरमा गया है। – फाइल फोटो

बंगाल में बीजेपी और TMC के बीच चल रही सियासी तनातनी की जद में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन भी आ चुके हैं। राज्य की CM ममता बनर्जी ने बीजेपी पर उन्हें परेशान करने का आरोप लगाकर उनके साथ खड़े होने की बात कही थी। अब अमर्त्य सेन ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है।

उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल पार्टियों के अपने लक्ष्य होते हैं, लेकिन सांप्रदायिकता को खारिज करना सभी का साझा मकसद होना चाहिए। इसके बिना हम (बंगाल के लोग) रविंद्र नाथ टैगोर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के वारिस नहीं बन पाएंगे।

न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि प्रदेश में शासन कर रही तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ लेफ्ट समेत दूसरी सेकुलर पार्टियों की भी यह जिम्मेदारी है कि सांप्रदायिकता यहां अपना सिर न उठा पाए। इन पार्टियों के प्रोग्राम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह जरूरी है कि सभी मिलकर सांप्रदायिकता के खिलाफ खड़ी हों।

‘बंगाल को सांप्रदायिकता की वजह से बहुत नुकसान हुआ है’

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर 87 साल के अमर्त्य सेन ने भरोसा जताया कि बंगाल के लोग सांप्रदायिकता को नकार देंगे, क्योंकि अतीत में बंगाल को इसकी वजह से बहुत नुकसान उठाना पड़ा था। हमने मजबूती से इसे नकारना सीख लिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव की वजह से राज्य के प्रतीकों पर कब्जा किया जा रहा है। रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, ईश्वर चंद्र विद्यासागर या स्वामी विवेकानंद, सभी एकजुट बंगाली संस्कृति चाहते थे। उनका इस्तेमाल करके एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। यही वह बंगाली संस्कृति है, जिससे हम जुड़े हैं और जिसका सपोर्ट करते हैं। 294 सीटों वाले पश्चिम बंगाल में अगले साल अप्रैल-मई में चुनाव होने वाले हैं।

प्लॉट पर कब्जे के मामले से विवाद में आए अमर्त्य सेन

अमर्त्य सेन और उनके परिवार पर विश्व भारती की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है। इस मसले पर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने प्रदेश सरकार को लेटर लिखा था। हालांकि, सेन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि वाइस चांसलर ने मीडिया पर गलत बयान दिया है।

सेन ने कहा कि विश्वभारती के वीसी जिस तरह से काम कर रहे हैं उससे मैं हैरान हूं। यह बहुत अजीब है, जिस तरह से मेरे बारे में गलत बयानबाजी कर रहे हैं कि मैंने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने मुझे जमीन वापस करने के बारे में कभी नहीं लिखा। उन्होंने दावा किया कि विश्वभारती की जिस जमीन पर उनका घर है] वह लंबे समय के लिए लीज पर ली गई है। अभी उसकी एक्सपायरी में काफी वक्त है।

भाजपा के आलोचक हैं सेन

अमर्त्य सेन भाजपा की राजनीतिक विचारधारा की वजह से पार्टी की आलोचना करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस विवाद के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से मैं किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का आलोचक हूं, जो सांप्रदायिक राजनीति करती है और हिंदू और मुस्लिम को बांटने के लिए उनकी भावनाएं भड़काती है।

विश्व भारती के वीसी विद्युत चक्रवर्ती ने इस बात का सबूत दिया है कि वे भाजपा का आदेश मान रहे हैं। लेकिन इन झूठे आरोपों के पीछे भाजपा जिम्मेदार है, सीधे तौर पर अभी यह नहीं कहा जा सकता।

अमर्त्य सेन को ममता का साथ मिला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने बंगाल सरकार को चिट्‌ठी लिखकर कहा था कि अमर्त्य सेन का नाम अवैध प्लॉट रखने वालों की लिस्ट में है। इसके बाद ममता बनर्जी सेन के बचाव में उन्हें खत लिखा था। ममता ने लिखा कि विश्वभारती में कुछ नए-नए घुसपैठियों ने आपकी घरेलू संपत्ति को लेकर चौंकाने वाले और बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। बहुसंख्यक धर्मांधों के खिलाफ आपकी लड़ाई में मैं साथ हूं। आप मुझे अपनी बहन समझिएगा।



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