Candy-cakes will not be given to children below 2 years, but the government did not accept the advice to reduce artificial sugar for adults. | 2 साल से छोटे बच्चों को कैंडी-केक नहीं देंगे, पर बड़ों के लिए कृत्रिम चीनी घटाने की सलाह सरकार ने नहीं मानी

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न्यूयॉर्क25 दिन पहले

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मंगलवार को जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि 2 साल से छोटे बच्चों को कृत्रिम शकर वाले प्रॉडक्ट देने से परहेज किया जाए। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

मंगलवार को जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि 2 साल से छोटे बच्चों को कृत्रिम शकर वाले प्रॉडक्ट देने से परहेज किया जाए। (फाइल फोटो)

  • दो तिहाई वयस्क आबादी मोटापे से पीड़ित है, लेकिन वैज्ञानिकों की सलाह दरकिनार कर दी

अमेरिका कोरोना से सबसे प्रभावित देश है। यहां सबसे अधिक केस सामने आ रहे हैं और मौतें भी सर्वाधिक हो रही हैं, लेकिन सरकार ने मंगलवार को वैज्ञानिकों की सलाह दरकिनार कर खानपान संबंधी नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें सिफारिश की गई है कि 2 साल से छोटे बच्चों को कृत्रिम चीनी (आर्टिफिशियल शुगर) वाले प्रॉडक्ट देने से परहेज किया जाए। वहीं ड्रिंक और कृत्रिम चीनी के मामले में 2015 की गाइडलाइन को ही दोहराया गया है।

दरअसल, अमेरिका में एग्रीकल्चर विभाग और डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज मिलकर हर पांच साल में खानपान संबंधी गाइडलाइन जारी करते हैं। सरकार इसका इस्तेमाल स्कूलों में लंच-मेन्यू आदि के मानक तय करने और खानपान संबंधी विभिन्न नीतियां बनाने में करती है। आम अमेरिकी भी खानपान का पैमाना इसी से तय करते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न कंपनियां भी इसी के आधार पर अपने खाद्य उत्पाद अपडेट करती हैं।

खाने में कृत्रिम चीनी 10% ही रखें
गाइडलाइन में कहा गया है कि नागरिक कुल कैलोरी में कृत्रिम चीनी की अधिकतम मात्रा 10% रखें और पुरुष रोज दो ड्रिंक से ज्यादा न लें। वहीं, महिलाओं को रोज एक से ज्यादा ड्रिंक न लेने की सलाह दी गई है। ड्रिंक और कृत्रिम चीनी संबंधी दोनों सिफारिशें जुलाई में वैज्ञानिकों की सलाह के विपरीत है।

वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया था कि प्रत्येक व्यक्ति को कृत्रिम चीनी की मात्रा कुल कैलोरी की 6% से कम कर देनी चाहिए और पुरुषों को रोज एक ड्रिंक से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। ताजा गाइडलाइन पर आलोचकों ने सवाल उठाया है कि इसमें महामारी का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया।

वैज्ञानिकों ने कहा था कि प्रमाण बताते हैं कि पेय पदार्थों में इस्तेमाल कृत्रिम चीनी से मोटापा बढ़ता है। इससे हृदय रोग और टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। अमेरिका में दो तिहाई से ज्यादा वयस्क मोटापे, डायबिटीज और अन्य संबंधित बीमारियों से जूझ रहे हैं। इससे कोरोना के गंभीर होने का भी खतरा बढ़ जाता है।

‘मात्रा सीमित करना स्वीकार्य नहीं’
सांता क्लारा यूनिवर्सिटी के डॉ. वेस्टली क्लार्क ने कहा कि ज्यादा शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है, लेकिन सामान्य ड्रिंकिंग से ऐसा होने के सबूत नहीं हैं। ड्रिंक की मात्रा सीमित करना कई लोगों के लिए सामाजिक, धार्मिक या सांस्कृतिक रूप से अस्वीकार्य हो सकता है। इसका बाकी गाइडलाइन पर उल्टा प्रभाव पड़ सकता है।

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