UK Coronavirus New Strain India Update; Health Ministry Issues SOPs For Epidemiological Surveillance And Response | पैंसेजर्स को अपने खर्च पर RT-PCR टेस्ट करवाना होगा; 8 जनवरी से शुरू होंगी फ्लाइट्स

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नई दिल्ली23 दिन पहले

कोरोना के नए स्ट्रेन की वजह से सरकार ने UK की उड़ानों पर 22 दिसंबर से रोक लगा दी थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर टेस्टिंग डेस्क भी बनाई गई हैं।

भारत से यूके की फ्लाइट्स 6 जनवरी से जबकि, यूके से भारत की उड़ानें 8 जनवरी से शुरू हो जाएंगी। हर हफ्ते दोनों तरफ से 15-15 उड़ानें ऑपरेट होंगी। ऐसे में कोरोना के नए वैरिएंट पर नजर रखने और इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसिजर (SOP) जारी किया है, जो एयरलाइंस और पैसेंजर्स के लिए है। UK से आने वाले यात्रियों को अपने खर्च पर RT-PCR टेस्ट करवाना जरूरी होगा।

SOP की खास बातें

1. UK से आने वाले पैंसेजर को एयरपोर्ट्स पर अपने खर्च पर RT-PCR टेस्ट करवाना जरूरी होगा।

2. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) एलिजिबल एयरलाइंस को UK के लिए लिमिटेड फ्लाइट्स की परमिशन जारी करेगा। इसका ध्यान रखा जाएगा कि UK से आने वाली 2 फ्लाइट्स के बीच वक्त रहे, ताकि एयरपोर्ट पर भीड़ नहीं हो। DGCA इस पर भी नजर रखेगा कि कोई एयरलाइंस UK से आने वाले पैसेंजर्स को किसी तीसरे देश के एयरपोर्ट के जरिए ट्रांजिट की परमिशन नहीं दे।

3. सभी पैंसेजर्स को पिछले 14 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री बतानी होगी। कोरोना जांच करवाने का डिक्लेरेशन फॉर्म भी भरना होगा।

4. 8 जनवरी से 30 जनवरी के बीच UK से आने वाले पैसेंजर्स को यात्रा से 72 घंटे पहले www.newdelhiairport.in पर सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म सबमिट करना होगा।

5. सभी यात्रियों को फ्लाइट से 72 घंटे पहले करवाए RT-PCR टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट साथ लानी होगी। यह www.newdelhiairport.in पर भी अपलोड करनी होगी।

6. एयरलाइंस को एनश्योर करना होगा कि निगेटिव रिपोर्ट दिखाने पर ही पैंसेजर को ट्रैवल की परमिशन दी जाए।

7. एयरलाइंस को एयरपोर्ट के वेटिंग एरिया में SOP से जुड़ी जानकारी डिस्प्ले करनी होगा। चेक-इन से पहले यात्रियों को इसके बारे में समझाना होगा और फ्लाइट के अंदर भी एनाउंसमेंट करना होगा।

8. एयरपोर्ट पर टेस्टिंग में जो पैसेंजर्स पॉजिटिव पाए जाएंगे, उन्हें स्टेट हेल्थ अथॉरिटीज के को-ऑर्डिनेशन वाले सेपरेट आइसोलेशन सेंटर में रखा जाएगा।

9. जीनोम सीक्वेंसिंग में अगर पुराना वैरिएंट मिलता है तो पेशेंट को होम आइसोलेशन या कोविड सेंटर में रखने का मौजूदा प्रोटोकॉल लागू होगा। अगर नया वैरिएंट मिलता है तो सेपरेट आइसोलेशन यूनिट में ही रखा जाएगा।

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