In US, people stopped taking coins to grocery stores, invested stimulus benefits in stock markets | अमेरिकी पब्लिक ने शेयरों में लगा दिए स्टीमुलस बेनेफिट के पैसे, रईसों की बढ़ी दिलचस्पी से हुई डिजाइनर पिल्लों की शॉर्टेज

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22 दिन पहले

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  • छोटे निवेशकों ने बोरियत मिटाने को ट्रेडिंग एकाउंट खोले होंगे लेकिन एनालिस्टों के मुताबिक कई बार बाजार चलाने में इनका अहम रोल रहा
  • अपना मकान लेने में बढ़ी मिडिल क्लास मिलेनियल्स की दिलचस्पी, US फेड रिजर्व के रेट कट के चलते घटे होम लोन रेट से मिला बढ़ावा

भारतीयों की तरह अमेरिकियों में भी कई मसलों पर मतभेद रहता है लेकिन इस बात पर सभी सहमत हैं कि साल 2020 कोविड-19 के चलते सबके लिए बुरा रहा है। पिछले साल बेरोजगारी और तनाव चरम पर रहा और कोरोनावायरस ने लाखों की जान ले ली, लेकिन अमेरिकियों के खरीदारी और कामकाज के तौर-तरीकों में कुछ दिलचस्प बदलाव आए। जो भी हो, कोविड-19 के चलते मची खींचतान के बीच लोगों की जिंदगी में हुए कुछ अजीब और सुखद परिवर्तन ने महामारी वाली अर्थव्यवस्था के अहम पहलू उजागर किए।

छुट्टे वापस लाने में नाकामयाब रहा फेड रिजर्व

कोविड-19 के चलते जब अमेरिका में मार्च और अप्रैल के दौरान लॉकडाउन हुआ तो वहां लोगों की खरीदारी के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया। कैश का लेन-देन कम हो गया और लोग ग्रॉसरी स्टोर पर रेजगारी कम ले जाने लगे, जिससे देशभर में क्वॉर्टर, निकल और पेनी की कमी हो गई। हालत ऐसी हो गई कि उनके सेंट्रल बैंकर फेड रिजर्व ने इन छुट्टे की कमी दूर करने के लिए एक टास्क फोर्स बना दिया। जब सिक्कों को लेकर साजिश की थ्योरी सर्कुलेट होने लगी तो उसको काटने के लिए फैक्ट चेकर्स को सामने आना पड़ गया। सरकार ने रेजगारी को सर्कुलेशन में लाने की पूरी कोशिश की है लेकिन फेड रिजर्व के मुताबिक, हालात अब तक सामान्य नहीं हुए हैं।

मार्च 2020 में खास आय वर्ग के लोगों में बंटी थी राहत…

अमेरिकी सरकार ने कोविड-19 के चलते हो रही दिक्कतों से लोगों को राहत दिलाने के लिए मार्च 2020 में कुछ खास आय वर्ग के लोगों के बीच 1,200-1,200 डॉलर बांटे थे। इन डॉलर को बहुत से परिवारों ने सरकार की उम्मीद के मुताबिक अपनी रोजमर्रा की जरूरतों में खर्च किए या उनको कर्ज उतारने में लगा दिए। यहां तक तो ठीक था क्योंकि सरकार चाहती थी कि लोगों के पास पैसे हों ताकि सिर पर छत बनी रहे और खाने-पीने की कमी न हो।

शेयरों में लगा दिए 1,200 डॉलर के राहत बेनेफिट

आपको जानकर ताज्जुब होगा कि कुछ लोगों ने ये पैसे रॉबिनहुड, चार्ल्स श्वाब और ई-ट्रेड जैसे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए शेयरों में लगा दिए। बहुत से छोटे निवेशकों ने शायद बोरियत मिटाने या बचत के निवेश के लिए ट्रेडिंग एकाउंट खोले होंगे लेकिन एनालिस्टों के मुताबिक कई बार तो बाजार को चलाने में इनकी ट्रेडिंग का अहम रोल रहा। ऐसे में रिटेल इनवेस्टर्स हाल ही में मंजूर हुई 600-600 डॉलर की नई वाली राहत और 300 डॉलर के बोनस वाले बेरोजगारी भत्ते के साथ क्या करेंगे, यह देखने वाली बात होगी।

लग्जरी मकानों की बिक्री 61% बढ़ी, सेकेंड होम की मांग दोगुनी…

नए बने रिटेल ट्रेडर्स ने शेयर बाजार से हुई कमाई का क्या किया होगा, यह भी सोचने वाली बात है। भारत में आमतौर पर लोग मोटी रकम हाथ लगने पर रियल एस्टेट में लगाने का सोचते हैं, तो शायद अमेरिकी भी ऐसा सोचते होंगे। ऐसा हुआ या नहीं, पता नहीं लेकिन रियल एस्टेट ब्रोकरेज फर्म रेडफिन के डेटा के मुताबिक, न्यूयॉर्क सिटी के बाहर के महंगे एरिया में मकानों की बिक्री नवंबर 2020 में सालाना आधार पर डेढ़ गुना हो गई और उनकी एवरेज सेल्स प्राइस 10.5 लाख डॉलर रही। यह ट्रेंड पूरे देश में दिखा जहां लग्जरी मकानों की बिक्री 30 नवंबर 2020 को खत्म तीन महीनों में सालाना आधार पर 61 पर्सेंट उछल गई जो अफोर्डेबल मकानों की बिक्री से नौ गुना ज्यादा रही।

K-शेप रिकवरी में रईसी बढ़ी, गरीबों की मुसीबत कम नहीं हुई

रेड फिन के मुताबिक अक्टूबर को खत्म साल में सेकेंड होम की डिमांड दोगुना हो गई। अफोर्डेबल होम के मुकाबले लग्जरी और सेकेंड होम की बिक्री में तेज उछाल अमीरों और गरीबों के बीच की खाई की ओर इशारा करती है जो कोविड-19 के वक्त बढ़ी है। यह K-शेप वाली इकोनॉमिक रिकवरी है, जिसमें महामारी ने अमीरों की रईसी बढ़ाई है लेकिन किसी तरह गुजारा करनेवाले अश्वेत, हिस्पैनिक और महिला वर्कर्स की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। K-शेप वाली रिकवरी का रेट हर आय वर्ग के लोगों में अलग-अलग होता है। अमीरों की आर्थिक सेहत जल्दी सुधरती है, गरीबों को वक्त लगता है या फिर वे कभी नहीं उबर पाते।

सिंगल फैमिली होम में बढ़ी मिलेनियल्स की दिलचस्पी

कोविड-19 के दौरान बिंदास मिलेनियल्स का जिक्र न हो तो बात अधूरी रहेगी। महामारी के बीच बहुत से मिडिल क्लास मिलेनियल्स की दिलचस्पी अपना मकान लेने में बढ़ी है। सबसे बड़ा फैक्टर अमेरिकी फेड रिजर्व के रेट कट हैं, जिनके चलते होम लोन रेट बहुत कम हो गया है। मिलेनियल्स के अपना घर लेने की बढ़ी चाहत का एक कारण वर्क फ्रॉम होम कल्चर के चलते उनका ऑफिस की चहारदिवारी से बाहर निकलना भी रहा है। ये लोग सिंगल फैमिली होम वाले शहरों यानी ‘जूम टाउन’ में जाने का सोच रहे हैं, जहां मकान थोड़े किफायती हैं।

ग्रॉसरी स्टोर्स में रेजगारी, टॉयलेट पेपर फिर आ जाएगा
कोविड-19 का टीका आने के बाद बढ़ा वर्क फ्रॉम होम कल्चर और इसके चलते बने दूसरे ट्रेंड्स कब तक रहेंगे, पता नहीं लेकिन कुछ ट्रेंड तो पक्का खत्म होते नजर आएंगे। जैसे ग्रॉसरी स्टोर्स में रेजगारी फिर से आ जाएगी और टॉयलेट पेपर्स का स्टॉक रहने लगेगा, जिनकी 2020 में भारी कमी हो गई थी। लोगों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बिदकने और आउटडोर एक्टिविटी में दिलचस्पी बढ़ने से बाइक हॉट प्रॉपर्टी हो गई थी और प्यारे-प्यारे पिल्लों की शॉर्टेज हो गई थी। जहां तक पिल्लों, डिजाइनर ब्रीड वाले, की शॉर्टेज की बात है तो यह भी महामारी वाली K-शेप इकोनॉमिक रिकवरी के कई पहलुओं को उजागर करता है।

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