Saudi joint venture partner sued Infosys in US | इन्फोसिस पर सउदी ज्वाइंट वेंचर पार्टनर ने किया मुकदमा, लगाए गलत कारोबारी तौर-तरीके अपनाने के आरोप

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21 दिन पहले

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  • SPC का आरोप, इन्फोसिस ने कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स से कमाई नहीं होने का झूठा दावा किया था, कमीशन आधा करने या माफ करने को कहा था
  • इन्फोसिस ने सउदी अरब के कस्टमर्स को सर्विस देने के लिए 2016 में ज्वाइंट वेंचर बनाया था, 2.12 करोड़ रुपये में 70 पर्सेंट स्टेक लिया था

इन्फोसिस की सउदी ज्वाइंट वेंचर कंपनी ने उस पर अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा कर दिया है। ज्वाइंट वेंचर कंपनी ने उस पर अमेरिकी भ्रष्टाचार कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इन्फोसिस के खिलाफ यह मुकदमा 21 दिसंबर को सउदी प्रिरोगेटिव कंपनी (SPC) की तरफ से किया गया। उसके मुताबिक बेंगलुरू की आईटी कंपनी ने रैकेटीयर इनफ्लूएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस एक्ट (RICO) का उल्लंघन किया है। SPC सउदी अरब में IT, कम्युनिकेशंस, डिफेंस, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर के लिए काम करती है।

इन्फोसिस का ‘झूठ’ क्या था?

SPC का आरोप है कि इन्फोसिस ने कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स से कमाई नहीं होने का उससे झूठा दावा किया था। SPC के मुताबिक इन्फोसिस ने उन कॉन्ट्रैक्ट्स पर दिया जाने वाला 8 पर्सेंट कमीशन आधा करने या माफ करने के लिए कहा था। इन्फोसिस पर सउदी ज्वाइंट वेंचर कंपनी ने आरोप लगाया है कि उन सौदों में उसकी बात मानने से SPC को फाइनेंशियल लॉस हुआ। SPC ने कहा कि बाद में पता चला कि इन्फोसिस जिन सौदों में फायदा नहीं होने की बात कही थी, असल में उन सौदों से उसको मोटी कमाई हुर्इ थी।

इन्फोसिस पर दूसरे संगीन आरोप

इन्फोसिस ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है और मुकदमा लड़ने की बात कही है। उसने कहा है कि वह जिन देशों में कारोबार करती है, वहां के सर्वोत्तम तौर-तरीकों का पालन करती है। SPC का कहना है कि इन्फोसिस सउदी अरब में उसकी व्यावसायिक पकड़ और प्रतिष्ठा का वर्षों से दोहन करने की कोशिश करती रही है। SPC ने इंफोसिस पर सउदी अरब की न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए दबदबे का इस्तेमाल करने की मांग करने के संगीन आरोप लगाए हैं।

बदले की कार्रवाई की शिकायत

SPC ने इन्फोसिस की बात नहीं मानने पर उसके खिलाफ बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि इन्फोसिस ने वित्तीय विवादों के चलते पिछले साल अप्रैल में ज्वाइंट वेंचर खत्म करने का अनुरोध किया था। इन्फोसिस ने सउदी अरब के कस्टमर्स को सर्विस देने के लिए 2016 में यह ज्वाइंट वेंचर बनाया था, जिसमें उसका 70 पर्सेंट स्टेक है। बेंगलुरु की आईटी कंपनी ने जेवी में 2.12 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

सउदी में इंफोसिस की छोटी प्रेजेंस

किसी तरह काम निकालने के लिए लोकल कंपनी पर दबदबे का इस्तेमाल करने का दबाव डालने के संगीन आरोप पश्चिम एशिया में इंफोसिस की संभावनाओं को चोट पहुंचा सकते हैं। विप्रो और टीसीएस के दबदबे वाले इस बाजार में इंफोसिस की फिजिकल प्रेजेंस बहुत छोटी है। इसकी कॉम्पिटिटर टीसीएस सउदी अरामको के लिए जीई के साथ मिलकर एक बैक ऑफिस सेंटर चला रही है, जिसमें सिर्फ महिलाएं ही काम करती हैं। जहां तक दूसरी कॉम्पिटिटर विप्रो की बात है तो वह 2002 से ही सउदी अरब में मौजूद है और सउदी अरामको और सउदी टेलीकॉम के लिए काम कर रही है।

नई बात नहीं मुकदमेबाजी

इन्फोसिस के खिलाफ कारोबार के गलत तौर तरीके अपनाने और नस्ली भेदभाव जैसे आरोपों में मुकदमेबाजी कोई नई बात नहीं है। 2017 और 2018 में एक व्हिस्लब्लोअर ने कंपनी में खराब कॉरपोरेट गवर्नेंस के आरोप लगाए थे जिसके बाद कंपनी से सीईओ विशाल सिक्का की रवानगी हुई थी।

लुढ़का था 6.6 अरब डॉलर का MCap

सितंबर 2019 में एक अज्ञात व्हिसलब्लोअर ग्रुप ने अमेरिकी सिक्योरिटीज रेगुलेटर और कंपनी के बोर्ड से शिकायत करके सीईओ सलिल पारिख पर शॉर्ट रेवेन्यू और प्रॉफिट के लिए कारोबार के गलत तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाया था। इस आरोप के चलते कंपनी के शेयरों और उस आधारित डिपॉजिटरी रिसीट्स के दाम में तेज गिरावट आई जिससे 6.6 अरब डॉलर का मार्केट कैप हवा हो गया था।

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