Cairn discussing proposals with India on arbitration award | केयर्न ने कहा- आर्बिट्रेशन ऑर्डर को लेकर सरकार से सभी प्रस्तावों पर चर्चा, सहमति से सुलझ सकता है मामला

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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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  • सिंगापुर की आर्बिट्रेशन कोर्ट ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को गलत बताया है
  • सरकार ने आर्बिट्रेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील का फैसला किया

केयर्न इंडिया ने रविवार को कहा कि उसने आर्बिट्रेशन ऑर्डर को लेकर भारत सरकार के साथ सभी संभावित प्रस्तावों पर चर्चा की है। केयर्न का कहना है कि कंपनी के शेयरहोल्डर्स के हित में वह इस मामले आपसी सहमति से सुलझाने के लिए तैयार है। कंपनी के मुताबिक, हमने पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ रचनात्मक चर्चा की है और इस मामले का कोई सौहार्दपूर्ण हल निकलने की उम्मीद है।

केयर्न ने दिसंबर में जीता था मामला

दिसंबर 2020 में केयर्न एनर्जी ने सिंगापुर की ऑर्बिट्रेशन कोर्ट में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के मामले में सरकार के खिलाफ जीत हासिल की थी। रेट्रोस्पेक्टिव का मतलब पुराने टैक्स के मामले से है। टैक्स विवाद के इस मामले में मध्यस्थता अदालत (आर्बिट्रेशन कोर्ट) ने भारत सरकार को 1.2 बिलियन डॉलर के अलावा इंटरेस्ट और पेनाल्टी की रकम चुकाने का आदेश दिया था। जिससे यह रकम बढ़कर 1.4 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई। भारत सरकार ने केयर्न एनर्जी को यह रकम नहीं चुकाई है। भारत को इस तरह के मामलों में 3 महीने के अंदर चैलेंज करना होता है। केयर्न का फैसला दिसंबर में आया है और इसकी चैलेंज करने की अंतिम तारीख 21 मार्च है।

केयर्न का भारत में ऑपरेटिंग का सफल इतिहास

कंपनी ने बयान में कहा है कि केयर्न का भारत में ऑपरेटिंग का सफल इतिहास है। हमने यहां अरबों डॉलर का निवेश किया है। इससे रोजगार आया है और स्थानीय समुदायों को लाभ मिला है। भारत में हमारे कारोबार से सरकार को 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू मिला है। 2014 में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के चलते हमारी संपत्ति को फ्रीज करने से सभी पक्षों पर नेगेटिव असर पड़ा है। हम इस मामले को पीछे छोड़कर पॉजिटिव तरीके से आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हैं।

केयर्न ने भारत सरकार के खिलाफ मामला दर्ज कराया

रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के 1.2 अरब डॉलर और इसकी ब्याज की वसूली को लेकर केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार के खिलाफ अमेरिका की एक जिला अदालत में मामला दर्ज किया है। यह मामला 1.2 अरब डॉलर (करीबन 9 हजार करोड़ रुपए) के टैक्स को लेकर दर्ज कराया है। केयर्न ने 12 फरवरी को यह मामला दर्ज कराया है। इसमें उसने 2014 से अब तक का ब्याज और अन्य की मांग की है।

आर्बिट्रेशन आर्डर के खिलाफ अपील करेगी सरकार

इस बीच केंद्र सरकार ने केयर्न इंडिया के हक में दिए गए आर्बिट्रेशन ऑर्डर के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है। सरकार आर्बिट्रेशन कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील में टैक्स लगाने के अपने अधिकार की बात करेगी। सूत्रों ने बताया कि सरकार केयर्न एनर्जी की तरफ से कई इंटरनेशनल कोर्ट में किए गए दावों को चुनौती भी देगी।

व्यापार समझौते का उल्लंघन

आर्बिट्रेशन के ऑर्डर के मुताबिक, भारत ने ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि केयर्न के भारत में 2006-07 में व्यापार के आंतरिक पुनर्गठन (internal reorganisation) पर 10,247 करोड़ रुपए का भारत का टैक्स का दावा सही नहीं है। ट्रिब्यूनल ने सरकार को अपने द्वारा बेचे गए शेयरों का पैसा लौटाने, डिविडेंड जब्त करने और टैक्स डिमांड की वसूली के लिए रोके गए टैक्स रिफंड का आदेश दिया था।

पेमेंट देने के लिए दबाव का इरादा

केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार पर पेमेंट के लिए दबाव बनाने के इरादे से अमेरिका में मुकदमा दर्ज कराया है। कंपनी ने पिछले महीने सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि अगर उसका पैसा जल्द नहीं मिला तो वह विदेश में भारत सरकार के असेट्स को जब्त करने पर मजबूर हो जाएगी। केयर्न एनर्जी ने इस बात का आंकलन शुरू भी कर दिया है कि वह किन असेट्स को जब्त कर सकती है। कंपनी एयर इंडिया के प्लेन और शिप को जब्त करने की योजना बना रही है।

भारतीय संपत्तियों का आंकलन करवा रही है

खबर है कि केयर्न कनाडा में भी कुछ भारतीय संपत्तियों का आंकलन करवा रही है। हालांकि उसके सीईओ का यह कहना है कि वह अभी भी भारत सरकार के साथ तेजी से काम करना चाहते हैं। बता दें कि भारत सरकार को वोडाफोन के इसी तरह के 2 अरब डॉलर के मामले में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि हाल ही में सरकार ने इस फैसले के खिलाफ चैलेंज किया है। ऐसे में केयर्न एनर्जी के मामले में भी सरकार कदम उठा सकती है।

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