Atlas of water bodies of Bihar begins publication, water bodies will be identified | एटलस ऑफ वाटर बाॅडीज ऑफ बिहार का प्रकाशन शुरू, जल निकायों की होगी पहचान

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पटना8 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar

प्रतीकात्मक फोटो।

  • अप्रैल तक गजेटियर को प्रकाशित करने का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रखा लक्ष्य

गजेटियर कम एटलस ऑफ वाटर बाॅडीज ऑफ बिहार के प्रकाशन का काम शुरू हो गया है। राज्य के सतही जल निकायों का यह एटलस विभिन्न जिलों में उपलब्ध सभी सतही जल निकायों का मानचित्र प्रस्तुत करेगा। उसमें जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सर्वेक्षित जल निकायों के आंकड़ों को पैमाना एवं माप यानी अक्षांश-देशांतर के साथ दर्शाया जाएगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की गजेटियर पुनरीक्षण शाखा ने काम शुरू कर दिया है। मानचित्र के सामान्य अवयव- सीमा रेखा, नदी, तालाब, फाॅन्ट साइज का निर्धारण हो गया है। सिंचाई विभाग से जरूरी आंकड़ा मिल गया है। ग्रामीण विकास विभाग से आंकड़ा मांगा गया है, वह अगले हफ्ते मिलना है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले जिलों के सत्यापन के लिए केंद्र सरकार के संस्थानों को उन जिलों का मानचित्र भेजा जा रहा है। तकनीकी सहयोग के स्तर पर केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों के अतिरिक्त राज्य के ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से सहयोग लिया जा रहा है।

जल निकायों के अतिरिक्त जिलों के इतिहास, पुरातत्व, जलवायु, कृषि, उद्योग आदि विषयों से संबंधित सूचनाओं के लिए विभिन्न विभागों के प्रकाशनों का उपयोग किया जा रहा है। विभाग ने अप्रैल तक इस एटलस को प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है।

250 पेज वाले एटलस में 100 से अधिक नदियों का हाेगा मानचित्र
अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि भारत में जल निकायों को गजेटियर के रूप में प्रकाशित करने वाला बिहार पहला राज्य होगा। यह एटलस पहली बार गांवों का भू-संकल्पित मानचित्र पेश करेगा। पैमाना आधारित मानचित्रों के कारण इस एटलस में प्रदर्शित गांव एवं पंचायतों का क्षेत्रफल एवं उनके मध्य की दूरी भी मापी जा सकेगी। इस 250 पेज वाले एटलस में सभी जिलास्तरीय 100 से अधिक नदियों एवं 50 हजार से अधिक जल संचयों को दर्शाया जाएगा।

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