Little children sitting at home forgetting the previous classes, in the new semester, they will also try to remind | घर बैठे नन्हें मुन्ने पिछली कक्षा की पढ़ाई भूल रहे, नए सत्र में वो भी याद दिलाने की कोशिश होगी

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बीकानेर8 मिनट पहले

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बच्चों के लिए एक खास वर्कशीट तैयार हो रही है, जो उसे याद दिलायेगी कि पिछली कक्षा में क्या पढ़ा था। - Dainik Bhaskar

बच्चों के लिए एक खास वर्कशीट तैयार हो रही है, जो उसे याद दिलायेगी कि पिछली कक्षा में क्या पढ़ा था।

कोरोना काल में पिछले सत्र में बिना परीक्षा उत्तीर्ण हुए प्रदेश के लाखों नन्हें-मुन्ने स्टूडेंट्स को परीक्षा तो देनी होगी लेकिन इस बार बहुत आसानी से उत्तीर्ण किया जायेगा। हर बार की तरह बच्चों काे ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। कारण साफ है कि कोरोना काल में पिछले एक साल से इन बच्चों की क्लास रूम बंद पड़े हैं। 15 मार्च से हुई छुटि्टयां अभी खत्म नहीं हुई है।

जो भूला, वो भी याद दिलायेंगे

शिक्षा विभाग भी मान रहा है कि छोटे बच्चे पिछले एक साल से पढ़ाई नहीं होने के कारण पिछली कक्षा में भी की गई, पढ़ाई भी अब भूल गया है। ऐसे में एक ऐसी वर्कशीट पर मशक्कत की जा रही है जिसमें पिछली कक्षा का कुछ हिस्सा होगा। अगली कक्षा में पढ़ने के लिए जिन कांसेप्ट्स का क्लीयर होना जरूरी है, वो सभी इस वर्कशीट में होगा। इतना ही नहीं कुछ हिस्सा नई कक्षा का भी होगा ताकि बच्चा पिछली और वर्तमान कक्षा के मिसिंग प्वाइंट्स को कवर कर सके।

तीन महीने में पढ़ना हाेगा

शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो यह वर्कशीट तीन महीने की होगी, जिसे बच्चों को अप्रैल, मई व जून में पूरा करना होगा। सभी विषयों की इस वर्कशीट को फिलहाल सरकारी स्कूलों के बच्चों को ही दिया जायेगा। निजी स्कूलों को अपने स्तर पर प्रयास करना होगा।

60 फीसदी का निर्णय हो चुका

शिक्षा निदेशालय ने यह तय कर चुका है कि कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की परीक्षा होती है तो उन्हें महज 40 फीसदी नंबर का ही पेपर देना होगा, जबकि शेष 60 फीसदी अंक उन्हें स्कूल की ओर से दिये जायेंगे। ये अंक किस आधार पर दिये जाएंगे, इसकी भी रूप रेखा तैयार हो रही है। इसी तरह कक्षा छह से 8वीं तक के बच्चों को भी 50 फीसदी अंक स्कूल की तरफ से दिए जाएंगे जबकि शेष 50 फीसदी का पेपर देना होगा।

पहली बार शैक्षिक मशक्कत

बीकानेर के प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में आमतौर पर शिक्षकों के वेतन, पदोन्नति, तरह तरह की खरीद जैसे ही मुद्दों पर काम होता है लेकिन कोरोना के कारण बिगड़े शैक्षिक सत्र को सुधारने के लिए पहली शैक्षिक मशक्कत हो रही है। स्वयं माध्यमिक शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी इसकी रिपोर्ट हर रोज ले रहे हैं। पहली बार ही बड़ी कक्षाओं के पेपर यहां से तैयार हो रहे हैं। पहली बार ही मॉडल टेस्ट पेपर तैयार हुए हैं। पहली बार प्राइमरी कक्षाओं के लिए भी माॅडल टेस्ट पेपर और वर्क बुक पर काम हुआ। यह बात अलग है कि वर्क बुक का प्रकाशन अब तक नहीं हो पाया है।

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